Monday, October 14, 2013

चैन से हमको जीने दो ..

मैं क्यों लिख रहा हूँ ... कुछ भी तो नहीं है मेरे पास..
शाख से टूटे पत्ते की तरह हूँ फिर भी मुझे जीया रहे हो, 
सोचते हो मनी प्लांट हूँ.. पानी भरी बोतल में डाल दोगे तो हरा भरा हो जाऊंगा.. 
क्या सोचा है मेरे से कुछ मिलेगा.. पागल हो गये हो ... तुम सब ..
जाओ यहाँ से मुझे चैन से मरने दो !!!

मैं और मेरा ये वक्त....

वक्त ने किया क्या हसीं सितम 
तुम रहे ना तुम  हम रहे ना हम  

बेकरार दिल इस तरह मिले 

जिस तरह कभी, हम जुदा न थे 
तुम भी खो गये, हम भी खो गये 
एक राह पर चल के दो कदम  

जायेंगे कहा, सूझता नहीं  

चल पड़े मगर रास्ता नहीं 
क्या तलाश हैं, कुछ पता नहीं 
बुन रहे हैं दिन ख्वाब दम-ब-दम